दोस्त कैसा होता है !

दोस्त कैसा होता है !


1) जब भी उदास होता हूँ तो मेरी
आवाज से सब कुछ समझ लेता है
मेरे दर्द को खुद भी बॉंट लेता है
मेरी उदासी को हसा कर भगा देता है
मेरे लिए तो वो जान भी दे सकता है
ऐसा सिर्फ एक सच्चा दोस्त ही होता है..!

 

Jab bhi Udhas hota hoon tho meri
Avaj se sab kuch samaj leta hai
Mere dard ko khud bhi bant leta hai
Meri udasi ko hasa kar bhaga deta hau
Mere liye tho wo jaan bhi de sakta hai
Aisa sirf ek saccha dost hi hota hai…!


2) मेरी जिंदगी का खुबसूरत हिस्सा था
मेरी खुशी की वो वजह था,
अपने गम छुपाकर मेरे गमो को पी जाता
वो कोई और नही मेरा दोस्त था..!

 

Meri jindagi ka khubsurat hissa tha
Meri Khushi ki wo wajah tha,
Apne gham chupakar mere gamo ko pi jata
Wo koi aur nahi mera dost tha…!


3) मित्रांशिवाय जग नाही
जगण्याला माझ्या अर्थ नाही
अर्थात मित्रांतच माझ जग आहे..!

 

Mitranshivay jag nahi
Jagnyala majya arth nahi
Arthath Mitrantach maj jag ahe..!


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